निमोनिया से सर्द मौसम में ऐसे बचाएं अपने बच्चो को

अक्टूबर महीने के बाद से मौसम तेजी से बदलने लगता है, सर्दियां आने की शुरुआत होती है। मौसम में तेजी से हुए बदलाव से काफी लोग बीमार पड़ जाते है खासकर बच्चे, जो की जल्दी ही सर्दी-जुखाम, बुखार और निमोनिया जैसी बिमारियों की चपेट में आ जाते है। निमोनिया एक प्रकार का फेफड़ो का संक्रमण होता है और ये किसी को भी हो सकता है। पर बच्चे अकसर सर्दियों में निमोनिया के शिकार हो जाते है। निमोनिया होने पर एक या दोनों फेफड़ो में तरल पदार्थ भर जाता है जिससे ओक्सीजन लेना मुश्किल हो जाता है। क्या आपको पता है की देश में लगभग 4 करोड़ 30 लाख लोग निमोनिया के शिकार है, इसको रोकने के लिए और इसकी जांच के बारे में लोगों को जागरूक करना बहुत जरूरी है खासकर सर्दियों में। WHO ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया की हर 1 घंटे में भारत में 45 बच्चो की मौत हो जाती है।

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IMA के नए अध्यक्ष एंव HCFI के अध्यक्ष डॉ K.K. अग्रवाल बताते है की, छोटे बच्चे, नवजात शिशु और 2 से 5 साल तक के बच्चे है जो कमजोर है उन्हें निमोनिया होने की आशंका ज्यादा होती है। खराब वातावरण, पोषण पूरा ना मिलना और माँ का बच्चे को दूध कम पिलाने की वजह से निमोनिया से ग्रसित बच्चे की जान भी जा सकती है। हम लोगों जागुरुक करके कई बच्चो की जान बचा सकते है। डॉक्टरो को भी चाहिए की वे जो पहली बार माँ बनी है उनको बच्चो को स्वस्थ रखने और समय पर टिका लगाने के बारे में उन्हें बताएं।

बच्चो को निमोनिया कई तरीको के जरिये हो सकता है। ज्यादातर कीटाणु बच्चो के नाक व गले में होते है। कीटाणु साँस के साथ चले जाये तो फेफड़ो तक भी जा सकते है। खांसी व छींकने से निकलने वाली बूंदों से हवा नली के द्वारा भी फ़ैल सकते है। इसके बचाव के लिए बच्चों को पोष्टिक खाना खिलाना और वातावरण को स्वच्छ रख कर निमोनिया को रोक सकते है। इसका इलाज एंटीबायटिक दवाइयों के जरिये हो सकता है पर सभी बच्चो को ये उपलब्ध नही हो पाती। बच्चो को सर्दियों में गर्म कपड़ो के जरिये उन्हें गर्म रखे और धूप भी लगाना जरूरी है।